
2017: – SHAWL DISTRIBUTION
SHAWL DISTRIBUTION HAS COMPLETED




32″ />.
INDEPENDENCE DAY CELEBRATION.






सदियों की गुलामी के पश्चात 15 अगस्त सन् 1947 के दिन आजाद हुआ। पहले हम अंग्रेजों के गुलाम थे। उनके बढ़ते हुए अत्याचारों से सारे भारतवासी त्रस्त हो गए और तब विद्रोह की ज्वाला भड़की और देश के अनेक वीरों ने प्राणों की बाजी लगाई, गोलियां खाईं और अंतत: आजादी पाकर ही चैन लिया। इस दिन हमारा देश आजाद हुआ, इसलिए इसे स्वतंत्रता दिवस कहते हैं।
ग्रेजों के अत्याचारों और अमानवीय व्यवहारों से त्रस्त भारतीय जनता एकजुट हो इससे छुटकारा पाने हेतु कृतसंकल्प हो गई। सुभाषचंद्र बोस, भगतसिंह, चंद्रशेखर आजाद ने क्रांति की आग फैलाई और अपने प्राणों की आहुति दी। तत्पश्चात सरदार वल्लभभाई पटेल, गांधीजी, नेहरूजी ने सत्य, अहिंसा और बिना हथियारों की लड़ाई लड़ी। सत्याग्रह आंदोलन किए, लाठियां खाईं, कई बार जेल गए और अंग्रेजों को हमारा देश छोड़कर जाने पर मजबूर कर दिया। इस तरह 15 अगस्त 1947 का दिन हमारे लिए ‘स्वर्णिम दिन’ बना। हम, हमारा देश स्वतंत्र हो गए।
यह दिन 1947 से आज तक हम बड़े उत्साह और प्रसन्नता के साथ मनाते चले आ रहे हैं। इस दिन सभी विद्यालयों, सरकारी कार्यालयों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है, राष्ट्रगीत गाया जाता है और इन सभी महापुरुषों, शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है जिन्होंने स्वतंत्रता हेतु प्रयत्न किए। मिठाइयां बांटी जाती हैं।
हमारी राजधानी दिल्ली में हमारे प्रधानमंत्री लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं। वहां यह त्योहार बड़ी धूमधाम और भव्यता के साथ मनाया जाता है। सभी शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है। प्रधानमंत्री राष्ट्र के नाम संदेश देते हैं। अनेक सभाओं और कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
RAKSHABANDHAN CELEBRATION.





रक्षाबंधन सामाजिक, पौराणिक, धार्मिक तथा ऐतिहासिक भावना के धागे से बना एक ऐसा पवित्र बंधन जिसे जनमानस में रक्षाबंधन के नाम से सावन मास की पूर्णिमा को भारत में ही नही वरन् नेपाल तथा मॉरिशस में भी बहुत उल्लास एवं धूम-धाम से मनाया जाता है। रक्षाबंधन अर्थात रक्षा की कामना लिए ऐसा बंधन जो पुरातन काल से इस सृष्टी पर विद्यमान है। इन्द्राणी का इन्द्र के लिए रक्षा कवच रूपी धागा या रानी कर्मवति द्वारा रक्षा का अधिकार लिए पवित्र बंधन का हुमायु को भेजा पैगाम और सम्पूर्ण भारत में बहन को रक्षा का वचन देता भाईयों का प्यार भरा उपहार है, रक्षाबंधन का त्योहार।
प्राचीन काल से प्रसंग भले ही अलग-अलग हो परंतु प्रत्येक प्रसंग में रक्षा की ज्योति ही प्रज्वलित होती रही है। पुरातन काल में रक्षा की भावना का उद्देश्य लिए ब्राह्मण क्षत्रिय राजाओं को रक्षा सूत्र बांधते थे, जहाँ राजा और ज़मींदार जैसे शक्तिवान एवं धनवान लोग उन्हे सुरक्षा प्रदान करने के साथ जीवन उपयोगी वस्तुएं भी उपहार में दिया करते थे।
हमारी पौराणिक मान्यता के अनुसार एक बार राजा इन्द्र पर दानवों ने हमला कर दिया जिसमें राजा इन्द्र की शक्ति कमजोर पङने लगी। तब इन्द्र की पत्नी इन्द्राणी जिनका शशिकला नाम था, उन्होने ईश्वर के समक्ष तपस्या तथा प्रार्थना की। इन्द्राणी की तपस्या से प्रसन्न होकर ईश्वर ने शशिकला को एक रक्षा सूत्र दिया । इन्द्राणी ने उसे इन्द्र के दाहिने हाँथ में बाँध दिया, इस पवित्र रक्षा सूत्र की वजह से इन्द्र को विजय प्राप्त होती है। जिस दिन ये रक्षासूत्र बांधा गया था उस दिन सावन मास की पूर्णिमा थी। संभवतः इसीलिए रक्षाबंधन का पर्व आज-तक सावन मास की पूर्णिमा को ही मनाया जाता है।
TWO WHEELCHAIR DISTRIBUTION

There will be two wheelchair distribution programme during the rainy season of 2016. The first is set for August 14th Sunday / Aug 21st Sunday.
A CHARITABLE FOUNDATION HAS A GOAL TO PROVIDE A FREE WHEELCHAIR TO EVERY CHILD, TEEN AND ADULT WORLDWIDE WHO NEEDS ONE BUT HAS NO MEANS TO ACQUIRE ONE.
“We are grateful to have had the opportunity to represent our district and to serve others in need. As a team, we were able to have a positive impact on the lives of individuals who are now better off. Thank you for the opportunity to serve others.”
DRAWING & PAINTING COMPETITION


We are arranging the “DRAWING & PAINTING COMPETITION” on the platform of Smt. Ambika Devi foundation – the charitable trust on dated 10th JULY 2016.
PH- 0261-2278912 Smt. Ambika Devi Foundation Regn. No. – E/7970/SURAT
MO- 9824198962 Charitable Trust, Udhna, Surat-394210
F- 68/69, silicon Shoppers, Udhna Main Road. Opp. Satya Nagar
E-mail: smtambikadevifoundation@gmai.com Web: www.smtambikadevifoundation.org
EVENTS – DRAWING & PAINTING COMPETITTION / DATE -10TH JULY 2016 SUNDAY / TIME – 11 A.M VENUE – SILICON SHOPPERS, UDHNA- SURAT
PRIMARY SECTION – DRAW A VASE AND A BEAUTIFUL ARRANGEMENT OF FLOWERS / NATURE SCENE OF A PARK WITH RAINBOW
SECONDARY SECTION – SAVE GIRL CHILD (POSTERS MAKING WITH MESSAGE)
HIGHER SECONDARY – A WORLD WITHOUT WATER
AWARD – FIRST PRIZE – MOBILE PHONE, SECOND PRIZE – Rs.2000/- , THIRD PRIZE- Rs.1000/-
AND COSOLATION PRIZES FOR REMAIN
NEW PLANTATIONS





धर्मशास्त्रों में वृक्षारोपण को पुण्यदायी कार्य बताया गया है । इसका कारण यह है कि वृक्ष धरती पर जीवन के लिए बहुत आवश्यक हैं । भारतवर्ष में आदि काल से लोग तुलसी, पीपल, केला, बरगद आदि पेड़-पौधों को पूजते आए हैं । आज विज्ञान सिद्ध कर चुका है कि ये पेडू-पौधे हमारे लिए कितने महत्त्वपूर्ण हैं ।
वृक्ष पृथ्वी को हरा- भरा बनाकर रखते हैं । पृथ्वी की हरीतिमा ही इसके आकर्षण का प्रमुख कारण है । जिन स्थानों में पेड़-पौधे पर्याप्त संख्या में होते हैं वहाँ निवास करना आनंददायी प्रतीत होता है । पेड़ छाया देते हैं । वे पशु-पक्षियों को आश्रय प्रदान करते हैं । पेड़ों पर बंदर, लंगूर, गिलहरी, सर्प, पक्षी आदि कितने ही जंतु बड़े आराम से रहते हैं । ये यात्रियों को सुखद छाया उपलब्ध कराते हैं । इनकी ठंडी छाया में मनुष्य एवं पशु विश्राम कर आनंदित होते हैं ।
वृक्ष हमें क्या नहीं देते । फल, फूल, गोंद, रबड़, पत्ते, लकड़ी, जड़ी-बूटी, झाडू, पंखा, चटाई आदि विभिन्न प्रकार की जीवनोपयोगी वस्तुएँ पेड़ों की सौगात होती हैँ । ऋषि-मुनि वनों में रहकर अपने जीवन-यापन की सभी आवश्यक वस्तुएँ प्राप्त कर लेते थे । जैसे-जैसे सभ्यता बड़ी लोग पेड़ों को काटकर उनकी लकड़ी से घर के फर्नीचर बनाने लगे । उद्योगों का विकास हुआ तो कागज, दियासलाई, रेल के डिब्बे आदि बनाने के लिए लोगों ने जंगल के जंगल साफ कर दिए । इससे जीवनोपयोगी वस्तुओं का अकाल पड़ने लगा । साथ ही साथ पृथ्वी की हरीतिमा भी घटने लगी ।
वृक्षों की संख्या घटने के दुष्प्रभावों का वैज्ञानिकों ने बहुत अध्ययन किया है । उन्होंने निष्कर्ष निकाला है कि वृक्षों के घटने से वायु प्रदूषण की मात्रा बड़ी है । वृक्ष वायु के प्राकृतिक शोधक होते हैं । ये वायु से हानिकारक कार्बन डायऑक्साइड का शोषण कर लाभदायक ऑक्सीजन छोड़ते हैं । ऑक्सीजन ही जीवन है और जीवधारी उसे लेकर ही जीवित रहते हैं । अत : धरती पर वृक्षों की पर्याप्त संख्या का होना बहुत आवश्यक होता है ।
वृक्ष वर्षा कराते हैं । ये जहाँ समूहों में होते हैं वहाँ बादलों को आकर्षित करने की क्षमता रखते हैं । वृक्ष मिट्टी को मजबूती से पकड़े रखते हैं और इसका क्षरण रोकते हैं । ये बाढ़ और अकाल दोनों ही परिस्थितियों को रोकने में सहायक होते हैं । ये मरुभूमि के विस्तार को कम करते हैं । ये वायुमंडल के ताप को अधिक बढ़ने से रोकने में बहुत मदद करते हैं । जहाँ अधिक पेडू-पौधे होते हैं वहाँ गर्मियों में शीतल हवा चलती है । इसीलिए समझदार लोग अधिक से अधिक संख्या में पेड़ लगाने की बात करते हैं ।
संतुलित पर्यावरण के लिए किसी बड़े क्षेत्र के एक-तिहाई हिस्से पर वनों का होना आवश्यक माना जाता है । लेकिन वर्तमान समय में वन इस अनुपात में नहीं रह गए हैं । इसके हानिकारक परिणाम सर्वत्र दृष्टिगोचर हो रहे हैं । अत : वर्तमान समय की आवश्यकता है कि हर कोई वृक्षारोपण करे । एक पेड़ काटा जाए तो तीन पेड़ लगाए जाएँ । मास का एक दिन वृक्षारोपण के लिए समर्पित हो । इस कार्य में विद्यार्थियों को सहभागी बनाया जाए । अनुर्वर भूमि पर, सड़कों के किनारे, पहाड़ी स्थलों पर, रिहायशी इलाकों में और जहाँ थोड़ा भी रिक्त स्थान हो पेड़ लगा दिए जाएँ ।
पेड़ बचेंगे तो जीव-समुदाय बचेगा । पेड़ रहेंगे तो लकड़ी की आवश्यकता की पूर्ति होगी और उद्योगों को कच्चा माल मिलता रहेगा । हमारी आगामी पीढ़ी को पेड़ों के अभाव में कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा । पेड़ और वन होंगे तो वन्य-जीवन को आश्रय मिलता रहेगा । दुर्लभ वन्य प्राणियों को विलुप्त होने से बचाया जा सकेगा ।
इसलिए सब लोगों को पेड़ लगाने का संकल्प लेना चाहिए । लोगों को वन-महोत्सव और वृक्षारोपण के अभियान में सक्रिय भागीदारी करनी चाहिए । सरकार उन तत्वों से सख्ती से निबटे जो वृक्षों और वनों की अंधाधुंध कटाई में संलिप्त हैं ।
धर्मशास्त्रों में वृक्षारोपण को पुण्यदायी कार्य बताया गया है । इसका कारण यह है कि वृक्ष धरती पर जीवन के लिए बहुत आवश्यक हैं । भारतवर्ष में आदि काल से लोग तुलसी, पीपल, केला, बरगद आदि पेड़-पौधों को पूजते आए हैं । आज विज्ञान सिद्ध कर चुका है कि ये पेडू-पौधे हमारे लिए कितने महत्त्वपूर्ण हैं ।
वृक्ष पृथ्वी को हरा- भरा बनाकर रखते हैं । पृथ्वी की हरीतिमा ही इसके आकर्षण का प्रमुख कारण है । जिन स्थानों में पेड़-पौधे पर्याप्त संख्या में होते हैं वहाँ निवास करना आनंददायी प्रतीत होता है । पेड़ छाया देते हैं । वे पशु-पक्षियों को आश्रय प्रदान करते हैं । पेड़ों पर बंदर, लंगूर, गिलहरी, सर्प, पक्षी आदि कितने ही जंतु बड़े आराम से रहते हैं । ये यात्रियों को सुखद छाया उपलब्ध कराते हैं । इनकी ठंडी छाया में मनुष्य एवं पशु विश्राम कर आनंदित होते हैं ।
वृक्ष हमें क्या नहीं देते । फल, फूल, गोंद, रबड़, पत्ते, लकड़ी, जड़ी-बूटी, झाडू, पंखा, चटाई आदि विभिन्न प्रकार की जीवनोपयोगी वस्तुएँ पेड़ों की सौगात होती हैँ । ऋषि-मुनि वनों में रहकर अपने जीवन-यापन की सभी आवश्यक वस्तुएँ प्राप्त कर लेते थे । जैसे-जैसे सभ्यता बड़ी लोग पेड़ों को काटकर उनकी लकड़ी से घर के फर्नीचर बनाने लगे । उद्योगों का विकास हुआ तो कागज, दियासलाई, रेल के डिब्बे आदि बनाने के लिए लोगों ने जंगल के जंगल साफ कर दिए । इससे जीवनोपयोगी वस्तुओं का अकाल पड़ने लगा । साथ ही साथ पृथ्वी की हरीतिमा भी घटने लगी ।
वृक्षों की संख्या घटने के दुष्प्रभावों का वैज्ञानिकों ने बहुत अध्ययन किया है । उन्होंने निष्कर्ष निकाला है कि वृक्षों के घटने से वायु प्रदूषण की मात्रा बड़ी है । वृक्ष वायु के प्राकृतिक शोधक होते हैं । ये वायु से हानिकारक कार्बन डायऑक्साइड का शोषण कर लाभदायक ऑक्सीजन छोड़ते हैं । ऑक्सीजन ही जीवन है और जीवधारी उसे लेकर ही जीवित रहते हैं । अत : धरती पर वृक्षों की पर्याप्त संख्या का होना बहुत आवश्यक होता है ।
वृक्ष वर्षा कराते हैं । ये जहाँ समूहों में होते हैं वहाँ बादलों को आकर्षित करने की क्षमता रखते हैं । वृक्ष मिट्टी को मजबूती से पकड़े रखते हैं और इसका क्षरण रोकते हैं । ये बाढ़ और अकाल दोनों ही परिस्थितियों को रोकने में सहायक होते हैं । ये मरुभूमि के विस्तार को कम करते हैं । ये वायुमंडल के ताप को अधिक बढ़ने से रोकने में बहुत मदद करते हैं । जहाँ अधिक पेडू-पौधे होते हैं वहाँ गर्मियों में शीतल हवा चलती है । इसीलिए समझदार लोग अधिक से अधिक संख्या में पेड़ लगाने की बात करते हैं ।
संतुलित पर्यावरण के लिए किसी बड़े क्षेत्र के एक-तिहाई हिस्से पर वनों का होना आवश्यक माना जाता है । लेकिन वर्तमान समय में वन इस अनुपात में नहीं रह गए हैं । इसके हानिकारक परिणाम सर्वत्र दृष्टिगोचर हो रहे हैं । अत : वर्तमान समय की आवश्यकता है कि हर कोई वृक्षारोपण करे । एक पेड़ काटा जाए तो तीन पेड़ लगाए जाएँ । मास का एक दिन वृक्षारोपण के लिए समर्पित हो । इस कार्य में विद्यार्थियों को सहभागी बनाया जाए । अनुर्वर भूमि पर, सड़कों के किनारे, पहाड़ी स्थलों पर, रिहायशी इलाकों में और जहाँ थोड़ा भी रिक्त स्थान हो पेड़ लगा दिए जाएँ ।
पेड़ बचेंगे तो जीव-समुदाय बचेगा । पेड़ रहेंगे तो लकड़ी की आवश्यकता की पूर्ति होगी और उद्योगों को कच्चा माल मिलता रहेगा । हमारी आगामी पीढ़ी को पेड़ों के अभाव में कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा । पेड़ और वन होंगे तो वन्य-जीवन को आश्रय मिलता रहेगा । दुर्लभ वन्य प्राणियों को विलुप्त होने से बचाया जा सकेगा ।
इसलिए सब लोगों को पेड़ लगाने का संकल्प लेना चाहिए । लोगों को वन-महोत्सव और वृक्षारोपण के अभियान में सक्रिय भागीदारी करनी चाहिए । सरकार उन तत्वों से सख्ती से निबटे जो वृक्षों और वनों की अंधाधुंध कटाई में संलिप्त हैं ।
Navratri Celebration
We had organized a Dandiya Dance Competition for our disabled kids on the last day of Navratri festival. Though we didn’t get any Sponsors to organize this competition, we executed it with the best way possible from our end. Kids who participated in this competition enjoyed to the core.
Blood Donation Camp
Blood Donation is not just necessary for one patient or for a hospital. It is necessary for the entire nation and every human being, who needs blood at the time of an emergency. As soon as an individual reaches the age of 18, he or she is eligible to donate blood.
When you donate blood you are eligible to get the same amount of blood irrespective of your blood group free of cost when you need the same. Blood is a natural gift for every human being. You have not purchased it or manufactured it, it is a natural gift and thus blood donation camps should be organized for people to donate blood for all those who are unfortunate to need the same to protect their lives.
Every time you donate your blood you will recoup within no time. Blood donation camps are held specifically to help the hospitals keep in stock sufficient blood that is generally required in times of emergency and can save a lot of human lives.
Children Health Check-up Camps
Health problems can be managed more effectively if, detected early. The Health Check-up programs of Lilavati Hospital aim to promote good health and to facilitate early detection of disease and identification of unhealthy lifestyle practices. Positive health is achieved through lifestyle modifications that includes a good diet, regular exercise and periodic visits to your family physician.
Our goal is to encourage people to take simple steps for a longer, healthier and happier life. Scheduling a Health Check-up is the first step to taking time for yourself and putting your own health care needs first.
At Lilavati Hospital and Research Centre, we have twelve customized packages to suit the requirement of varying lifestyles carried out in a completely delightful environment. Our Health Checks are designed such that the whole experience of the Health Check is not only informative but also very composed and peaceful.
